एक बार की बात है एक जंगल में बंदरों की एक टोली रहा करती थी |
इसी टोली में एक डुग्गु नाम का चालाक बन्दर रहता था | डुग्गु काफी जिज्ञासु बन्दर था और नए-नए प्रयोग करना उसकी आदत थी |
अपनी इसी जिज्ञासा के चलते डुग्गु अन्य बंदरों की अपेक्षागत बहुत ही तेज-तर्रार था और तरह-तरह से कलमंडी खा कर पेड़ों पर करतब भी दिखाया करता था |
अपनी काबिलियत के चलते डुग्गु बंदर किसी और को अपने सामने गिनता तक नहीं था और अपनी ही मर्जी से सभी काम करता था, उसे जिस भी काम को करने के लिए मना किया जाता उसे तो वह जरूर ही करता था |







