हिन्दू ग्रंथों के अनुसार यह कहानी आज से हजारों साल पहले घटित हुई थी | यह कहानी महाभारत काल की कहानी है जब घर के पुत्रों को युवावस्था में अपने गुरु जी के आश्रम अथवा गुरुकुल में रहकर ही शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा ग्रहण करनी हुआ करती थी |
सभी शिष्य अपने गुरु से सच्ची श्रद्धा और ईमानदारी से शिक्षा ग्रहण करते और साथ ही साथ बाकी दिनचर्या के कामों को भी करते थे जैसे- जंगल से लकड़ी इक्खट्ठी करना, अपने गुरु के साथ भोजन सामिग्री इक्खट्ठी करना, पूजा-पाठ करना, इत्यादि |


